कौन कहता है कि आँखे धोखा नहीं देती ? आँखे केवल बाहर के प्रकाश को विसुअल कोर्टेक्स में ले जाने का काम करती हैं। इसको किसी चीज़ का रूप देना दिमाग का काम है आँखों का नहीं। आप नीचे दिखाई गयी तस्वीर को देखिये। Photo Credit : Wikimedia.org क्या आप बता सकते हैं कि A और B में कौन ज्यादा भूरा है और कौन कम भूरा है ? 100% लोग बोलेंगे कि A गहरे रंग का है। क्या कहती हैं आपकी आँखे ? बिलकुल ठीक यहीं तस्वीर नीचे दिखाई गई है। Photo Credit : Wikimedia.org क्या A और B के रंग में कोई अंतर है ? यह भी पढ़े : गूगल का कंपटीशन किसके साथ है ? अगर है तो शायद आपको अपनी आँखे डॉक्टर से चेक करवानी चाहिए। अगर नहीं तो क्या आँखें धोखा नहीं दीं ? धोखा देना या ना देने का काम आँखों का नहीं दिमाग का है। दिमाग अक्सर धोखा देता है हमें। अगर फिर से कोई ऐसी बात कहे तो उनको अपनी गलती सुधारने के लिए कहिये।
मसूद अज़हर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के बाद मोदी का बयान "आगे-आगे देखिये होता है क्या" इसके क्या मायने हो सकते है ----- इस लेख में आप पढ़ेंगे : आतंक विरोधी घोषणाओं का लांच पैड अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद क्या क्या प्रतिबंध लगाए जाते हैं मसूद अजहर पर यूएन के प्रतिबंधों के बाद भारत की भूमिका एक दशक बाद आखिर चीन क्यों झुका भारत को इस सफलता के लिए क्या कीमत चुकानी पड़ी मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की 1267 कमिटी द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाने के बाद भारत की क्या भूमिका रहेगी ? पहले हम कुछ तथ्यों को देख लेते हैं राजस्थान बना आतंक विरोधी घोषणाओं का लांच पैड : पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की गई उसकी पुष्टि राजस्थान के चूरू से की गई। मसूद पर भारत की इस अभूतपूर्व कूटनीतिक जीत की पुष्टि भी राजस्थान से ही जयपुर रैली में की गई 1999 के करगिल हमले के बाद भी राजस्थान के सीकर जिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इस उपलब्धि की घोषणा की वर्ष 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के समय...
जनमत सर्वेक्षण या आम बोलचाल में कहे तो EXIT POLL : इस लेख में आप पढ़ेंगे : लोक सभा आम चुनाव 2014 के अंतिम परिणाम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बिहार विधानसभा चुनाव 2015 2019 का सेमीफइनल राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 जनमत सर्वेक्षण या आम बोलचाल में कहे तो EXIT POLL जिसके अंतर्गत चुनावी मतदान के पहले नाना प्रकार के टीवी चैनल्स माइक कैमरा लेकर युद्ध स्तर की तैयारियों समेत सड़कों पर उतर जाते हैं और प्रिय पार्टी जीत की घोषणा चुनाव आयोग से पहले ही कर देते हैं अगर सारा काम न्यूज़ रूम में बैठे पत्रकार ही कर लेंगे तो संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक निकाय की शुरुआत ही क्यों की इन आंकड़ों पर एक बार नजर डालिए। यह लोक सभा आम चुनाव 2014 के अंतिम परिणाम है : Credit : Google यह रहे 2014 के जनमत सँग्रह : credit : wikipedia credit : wikipedia यह उच्च कोटि के न्यूज़ एजेंसियों द्वारा करवाये गए जनमत संग्रह है। जिसमे कुछ नतीजो को छोड़कर शेष में से कोई भी असल नतीज...
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